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प्राइवेट अस्पतालों में कमरों के लिए देना होगा अधिक चार्ज

अब ICU (इंटेसिव केयर यूनिट) को छोड़कर अब प्रतिदिन 5,000 रुपये से अधिक वाले अस्पताल के कमरों पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा. जितने दिन मरीज इलाज के दौरान बेड पर रहेगा, उसे रोज 200 रुपये से ज्यादा अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ सकती है

 जीएसटी परिषद की ओर से कई क्षेत्रों के लिए जीएसटी दरों में संशोधन किया गया है और कई ऐसी चीजों को जीएसटी के दायरे में लाया गया है, जिसपर अबतक टैक्स नहीं लगता था. इसके चलते आज सोमवार, 18 जुलाई, 2022 से देश में कई सेवाएं और उपभोग की वस्तुएं महंगी हो गई हैं. इनमें अस्पताल का इलाज भी शामिल है. नए संशोधन के मुताबिक, अब मरीजों को निजी अस्पतालों में कमरों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे.

प्राइवेट अस्पतालों के कमरों के किराए को भी शामिल किया है. अब ICU (इंटेसिव केयर यूनिट) को छोड़कर अब प्रतिदिन 5,000 रुपये से अधिक वाले अस्पताल के कमरों पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा. जितने दिन मरीज इलाज के दौरान बेड पर रहेगा, उसे रोज 200 रुपये से ज्यादा अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ सकती है.

 परिषद की ओर से यह प्रस्ताव लाए जाने के बाद फिक्की, एसोचैम, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे कुछ और संगठनों ने इसका विरोध किया था. इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी भी लिखी गई थी. इनका कहना था कि इसका असर सीधे अस्पतालों और मरीजों पर पड़ेगा. महंगी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच अस्पताल अपनी लागत के चलते यह टैक्स जनता की ओर पास कर देंगे. इसका सीधा असर मरीज के इलाज के बिल पर पड़ेगा.

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