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दिवाली पर सूर्य ग्रहण का साया, अगले दिन नहीं हो पाएगा गोवर्धन पूजा

इस वर्ष के आखिरी सूर्य ग्रहण के कारण इस बार पांच दिवसीय दीपोत्सव छह दिवसीय होगा। चर्तुदशी युक्त अमावस्या में दिवाली का पर्व 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि 25 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा के दिन खंडग्रास सूर्यग्रहण रहेगा, भारत में ग्रहण की शुरूआत शाम 4.15 से 5.30 के मध्य होगी। ऐसा संयोग 27 साल बाद बना है।

ग्रहण के समय होगा सूर्य अस्त 

बिड़ला तारामंडल के सहायक निदेशक संदीप भट्टाचार्य ने बताया कि सूर्य ग्रहण देखने के लिए एक्लिप्स ग्लास का इस्तेमाल करें। इस दौरान चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीचों बीच आ जाएगा, जिससे चन्द्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ेगी और कुछ देर के लिए सूर्य का प्रकाश कम दिखाई देगा। भारत के अधिकांश हिस्सों में ग्रहण के साथ ही सूर्य अस्त हो जाएगा। यूरोप, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अफ्रीका के कुछ देशों उत्तरी हिन्द महासागर, पश्चिमी एशिया आदि में अधिक समय तक रहेगा।

टूटेगी पंरपरा
ज्योतिषाचार्य पं.पुरूषोत्तम गौड़ ने बताया कि आमतौर पर गोवर्धन पूजा के दिन भगवान को गर्म तासीर के व्यंजन बाजरा, चावल, मूंग और मोठ सहित कच्चे भोजन का भोग लगाया जाता है। इस बार यह परम्परा टूटेगी। सूर्य ग्रहण के दिन गोविंद देवजी मंदिर में शाम को दर्शन खुले रहेंगे। 25 अक्टूबर को शाम 5 बजे वाली ग्वाल झांकी नहीं होगी। संध्या झांकी 5.45 से 6.45 के बजाय 7.30 से 8.15 तक व शयन झांकी रात 8 से 8.15 के बजाय 8.45 से रात 9 बजे तक होगी। ग्रहण काल के दौरान मंदिर के पट खुले रहेंगे एवं हरिनाम संकीर्तन होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दिवाली पूजा पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं होगा।
खण्डग्रास सूर्य ग्रहण का समय
समस्त भूमंडल पर : दोपहर 2.28 बजे से प्रारंभ
ग्रहण मध्य : 4.30 बजे
ग्रहण समाप्त : शाम 6.32 बजे 

दीपावली पूजन का मुहूर्त
सर्वश्रेष्ठ समय : प्रदोष काल सायं 5.47 से रात्रि 8.21 बजे तक

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