1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन!

सिंगल यूज प्लास्टिक पर केन्द्र सरकार ने 1 जुलाई से प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी है। बगैर विकल्प दिए की गई इस घोषणा का भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल घोर विरोध करता है। एवं केन्द्र सरकार से मांग करता है कि विकल्प तैयार होने तक इस बैन को स्थगित रखा जाए। केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जयवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव से बीयूवीएम ने मांग की है कि प्लास्टिक स्टिक वाले ईयर बर्ड्स, गुब्बारों के प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक फ्लेग, कैंडी स्टिक, आइस्क्रीम स्टिक, थर्माकोल, प्लास्टिक कप-प्लेट-गिलास, प्लास्टिक पैकिंग का सामान, प्लास्टिक से बने इनवेटेशन कार्ड, सिगरेट पैकेट्स, प्लास्टिक और पीवीसी बैनर (100 माइक्रोन से कम), स्टिरर और विभिन्न प्रकार के कैरी बैग ये सभी प्लास्टिक के ऐसे उत्पाद है जो आम आदमी के जीवन में रच-बच गए हैं। बीयूवीएम पर्यावरण हर स्थिति में सुरक्षित एवं स्वच्छ रखा जाए का हामी है। परन्तु दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाले इन उत्पादों का विकल्प खोजना आवश्यक है। इसके लिए स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देकर इन उत्पादों के विकल्प तैयार करने में केन्द्र सरकार को अहम भूमिका निभानी पड़ेगी।

भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल के राष्ट्रीय चेयरमेन बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण नियंत्रण कानून 1986 तथा पीडब्ल्यूएम रूल 2016 की धारा 3(सी) के अन्तर्गत सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर बैन घोषित किया है। बैन से देश की एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां बंद होगी। सिंगल यूज प्लास्टिक व्यापार से जुडे़ तीन करोड़ व्यापारी बेरोजगार होंगे। बीयूवीएम केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए इस बैन का सम्मान करता, यदि प्रभावित बीयूवीएम के प्रतिनिधियों से पूरी चर्चा कर इसका विकल्प सुनिश्चित कर लिया जाता। गुप्ता ने कहा कि अमेरिका, यूरोप तथा अन्य देशों के मुकाबले भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नाममात्र का ही है। ऑनलाइन व्यापार करने वाली कंपनियां, दवा निर्माता, शर्बत निर्माता, आइस्क्रीम निर्माता आदि व्यापारी इसका विशेष उपयोग कर रहे हैं। इनसे संबंधित व्यापार पर भी सिंगल यूज प्लास्टिक के बैन का विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
कैटरिंग खर्च 40 से 50 फीसदी बढ़ जाएगा
सरकार को रोक से पहले अन्य भोजन समारोह करने वालों इस पर विचार करना चाहिए था। इस फैसले से कैटरिंग खर्च 40 से 50 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। बिस्किट, उत्पाद कुटीर उद्योग भी इससे जुड़े हुए है। चिप्स, नमकीन और पैकेज्ड पेय कार्यरत करीब एक लाख लोगों कंपनियों और पैकेजिंग मेटेरियल की मुश्किल बढ़ जाएगी। प्रदेश की लागत बढ़ेगी, क्योंकि पेपर में डिस्पोजेबल उत्पादों का स्ट्रा तथा वैकल्पिक उत्पादों की कारोबार करीब 5000 करोड़ रुपए का है और इससे 10,000 व्यापारी जुड़े हैं। ऑल इंडिया टैंट डेकोरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि जिंदल के मुताबिक एक हजार लोगों के भोजन की कैटरिंग में 150 किलो प्लास्टिक का उपयोग होता है। इसकी लागत करीब 30,000 रुपए बैठती है। अब सिंगल यूज प्लास्टिक के वैकल्पिक उत्पादों की लागत करीब 45,000 रुपए हो जाएगी।

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