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ट्रेन की बर्थ पर बेटे को छोड़ गई मां,

गरीबी किसी की लाचारी कैसे बन सकती है, इसका उदाहरण बनी एक ऐसी मां जिसने अपने दूधमुंहे बच्चे को ट्रेन में सिर्फ इसलिए लावारिस छोड़ दिया कि वह उसका लालन-पालन नहीं कर सकती थी। पति की मौत के बाद चार बच्चों की इस मां ने अपनी चौथी संतान को रतलाम-ग्वालियर एक्सप्रेस के डी-6 कोच में लावारिस छोड़ दिया। इस बच्चे के साथ महिला ने एक चिट्ठी भी छोड़ी है। इस चिट्ठी में महिला ने करुणा भरे शब्दों में गुहार लगाई है।

 

जानें महिला ने चिट्ठी में क्या लिखा?
उसने लिखा है कि’मेरे चार बच्चे हैं और पति की मौत हो चुकी है। मेरे परिवार में और कोई नहीं है। ये बच्चा सिर्फ दूध पीता है। मैं इस बच्चे को पालूं या फिर बाकी तीन को। इस हालत में इस बच्चे को छोडऩा मेरी मजबूरी है। मैंने इसे अनाथालय में छोडऩे की बहुत कोशिश की लेकिन किसी ने भी बच्चे को नहीं लिया। कोई मेरी मजबूरी नहीं समझ रहा है। मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है। मैं इस बच्चे को नहीं पाल सकती। इसे यहां छोड़कर जाना मेरी मजबूरी है। मैं विनती करती हूं कि मेरी मजबूरी समझें। मेरे ऊपर कृपा करें। मेरा हाथ जोड़कर निवेदन है कि इस बच्चे को अनाथालय में छोड़ दें।’

गुना से ट्रेन में बैठी थी महिला
इस कोच में सफर कर रहे लोगों से पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन सीआरपीएफ को इतना ही पता चल पाया कि महिला गुना से कोच में सवार हुई थी और शिवपुरी के बाद फिर नहीं दिखी। ट्रेन के ग्वालियर पहुंचने से पहले मुसाफिरों ने टीटीई को बच्चे की सूचना दी। टीटीई ने कंट्रोल को कहा। ट्रेन के ग्वालियर पहुंचने पर सीआरपीएफ के साथ चाइल्ड लाइन की टीम भी स्टेशन पहुंच गई।

जांच में पता चला मानसिक रूप से कमजोर है बच्चा
बाल कल्याण समिति ने बच्चे की मेडिकल जांच करवाई तो पता चला कि वह मूक-बधिर होने के साथ ही मानसिक रूप से भी कमजोर है। शायद इसीलिए उससे छुटकारा पाने के लिए महिला उसे ट्रेन में लावारिस छोड़ गई। रेलवे सुरक्षा बल निरीक्षक संजय कुमार आर्या का कहना है कि महिला ने जो चिट्ठी छोड़ी है उसमें उसका पता-ठिकाना नहीं लिखा है। आरपीएफ के उपनीरिक्षक अंकित कुमार की मौजूदगी में इस टीम ने बच्चे को अपने कब्जे में लिया। बच्चे के पास ही बर्थ पर उसकी मां के द्वारा छोड़ा गया पत्र मिला, जिसमें सारी कहानी सामने आई। रेलवे के टीम मेंबर इरफान के हवाले कर दिया। इरफान के मुताबिक उन्होंने बच्चे को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया, जहां से उसे शिशु गृह में भिजवा दिया गया।

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