ब्रेकिंग न्यूज़

Manish Sisodia: क्या है वो शराब नीति घोटाला जिसपर सिसोदिया समेत 20 जगह पहुंच गई सीबीआई

CBI Raid on Manish Sisodia: दिल्ली एक्साइज पॉलिसी पर सीबीआई एक्शन में आ गई है। सुबह-सुबह राज्य के डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया समेत के घर समेत 20 ठिकानों पर छापेमारी हुई है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने आबकारी नीति में घपले के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी थी।

नई दिल्ली: दिल्ली की नई एक्साइज पॉलिसी पर बवाल लगातार जारी है। आज सुबह-सुबह दिल्ली के डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) समेत देशभर में 20 ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी हुई है। पिछले कुछ वक्त से नई शराब नीति पर दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना (Vijay Kumar Saxena) और दिल्ली सरकार में तलवारें खिची हुई हैं। उपराज्यपाल इस मामले की सीबीआई जांच को मंजूरी दे चुके हैं और केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में एक्शन में आ चुकी है। आइए जानते हैं कि दिल्ली आबकारी नीति क्या है और किस मुद्दों पर मचा है इतना बवाल।

दिल्‍ली की आबकारी नीति 2021-22 क्‍या है?

नई आबकारी नीति के जरिए दिल्‍ली सरकार शराब खरीदने का अनुभव बदलना चाहती थी। नई पॉलिसी में होटलों के बार, क्‍लब्‍स और रेस्‍टोरेंट्स को रात 3 बजे तक ओपन रखने की छूट दी गई है। वे छत समेत किसी भी जगह शराब परोस सकेंगे। इससे पहले तक, खुले में शराब परोसने पर रोक थी। बार में किसी भी तरह के मनोरंजन का इंतजाम क‍िया जा सकता है। इसके अलावा बार काउंटर पर खुल चुकीं बोतलों की शेल्‍फ लाइफ पर कोई पाबंदी नहीं होगी। इस नीति के लागू होने के बाद दिल्ली के कुल 32 जोन में कुल 850 में से 650 दुकानें खुल गई हैं। दिल्ली सरकार का दावा है कि इससे राज्य का राजस्व बढ़ेगा। दिल्‍ली सरकार की नई आबकारी नीति में अलग-अलग बातों को शामिल किया गया था। इस नीति के तहत दुकान पर यह देखना होगा कि कम उम्र के व्‍यक्ति को शराब न बेची जाएगी। आईडी चेक क‍िया जाएगा। इसके अलावा शराब की दुकान के बाहर स्‍नैक्‍स या खाने-पीने की दुकान नहीं खुल सकेगी ताकि खुले में शराब पीना कम हो। नीति के अनुसार, सरकार किसी भी शराब की दुकान की मालिक नहीं होगी। पॉलिसी में प्राथमिकता कंज्‍यूमर की चॉइस और ब्रैंड्स की उपलब्‍धता पर देनी है; स्‍मगलिंग और बूटलेगिंग रोकना है। नीति में दिल्‍ली में शराब की दुकानें इस तरह हों कि कोई इलाका छूट न जाए और कहीं ज्‍यादा दुकानें न हो जाएं। ई-टेंडरिंग के जरिए हर जोन ऑपरेटर के लिए नया L-7Z लाइसेंस होगा।

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद एक्शन

चीफ सेक्रेटरी द्वारा दिल्ली के एलजी को भेजी गई रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि पहली नजर में यह जाहिर होता है कि नई एक्साइज पॉलिसी को लागू करने में जीएनसीटी एक्ट-1991, ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 का उल्लंघन किया गया है। साथ ही टेंडर जारी होने के बाद 2021-22 में लाइसेंस हासिल करने वालों को कई तरह के गैरवाजिब लाभ पहुंचाने के लिए भी जानबूझकर बड़े पैमाने पर तय प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है। एलजी ऑफिस की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993 के रूल नंबर 57 के तहत चीफ सेक्रेटरी ने यह रिपोर्ट एलजी को भेजी थी। यह रूल कहता है कि पूर्व निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन में कोई भी कमी पाए जाने पर चीफ सेक्रेटरी तुरंत उस पर संज्ञान लेकर उसकी जानकारी एलजी और सीएम को दे सकते हैं। यह रिपोर्ट भी इन दोनों को भेजी गई थी। दावा है कि शराब बेचने का लाइसेंस हासिल करने वालों को टेंडर जारी होने के बाद भी बड़े पैमाने पर गैरवाजिब लाभ पहुंचाने का काम किया गया, जिससे सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में एक्साइज विभाग के शराब विक्रेताओं की 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।रिपोर्ट में एक्साइज विभाग के शराब विक्रेताओं की 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

केजरीवाल सरकार पर क्‍या आरोप है?

आरोप है कि कैबिनेट को भरोसे में लिए बिना तमाम नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर तमाम निर्णय लिए। यहां तक कि कैबिनेट से यह निर्णय भी पास करवा लिया गया कि अगर पॉलिसी को लागू करने के दौरान उसके मूलभूत ढांचे में कुछ बदलाव करने की जरूरत हो तो आबकारी मंत्री ही वो बदलाव कर सकें। हालांकि, तत्कालीन एलजी ने कैबिनेट के इस फैसले पर सवाल उठाए, जिसके बाद 21 मई को हुई कैबिनेट मीटिंग में यह निर्णय वापस ले लिया गया, लेकिन इसके बावजूद एक्साइज विभाग मनमाने तरीके से लिए गए फैसलों को लागू करता रहा। बाद में जब लगा कि जांच में ये गड़बियां सामने आ जाएंगी और चीफ सेक्रेटरी ने भी अपने नोट में इनका जिक्र किया, तो आनन-फानन में इन गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने के लिए 14 जुलाई को दोपहर 2 बजे कैबिनेट की एक अर्जेंट बैठक बुलाई गई, जिसका नोटिस खुद चीफ सेक्रेटरी को उसी दिन सुबह 9:32 बजे भेजा गया। कैबिनेट में किन मुद्दों पर चर्चा होने वाली है, उसके संबंध में कोई कैबिनेट नोट भी सर्कुलेट नहीं किया गया, जो कि अपने आप में नियमों का उल्लंघन था। मीटिंग खत्म होने और निर्णय लेने के बाद शाम 5 बजे एलजी सचिवालय को एजेंडा और कैबिनेट नोट प्राप्त हुआ।

नई आबकारी नीति पर क्‍या आपत्तियां हैं?

दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति दिल्ली को 32 जोन में बांटती है, उसके मुताबिक बाजार में केवल 16 खिलाड़ियों को इजाजत दी जा सकती है और यह एकाधिकार को बढ़ावा देगी। विपक्षी दलों का आरोप है कि नई आबकारी नीति के जरिए केजरीवाल सरकार ने भ्रष्‍टाचार किया। दिल्‍ली में शराब के कई छोटे वेंडर्स दुकानें बंद कर चुके हैं। उनका कहना है कि कुछ बड़े प्‍लेयर्स अपने यहां स्‍टोर्स पर भारी डिस्‍काउंट से लेकर ऑफर्स दे रहे हैं, इससे उनके लिए बिजनेस कर पाना नामुमकिन हो गया है। अदालतों में वकीलों ने कहा कि उन्हें थोक कीमत के बारे में पता है, लेकिन यह साफ नहीं है कि उन्हें किस दाम पर शराब की बिक्री करनी होगी।

दिल्‍ली सरकार का क्‍या तर्क था?

हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार ने कहा था कि उसकी नई आबकारी नीति 2021-22 का मकसद भ्रष्टाचार कम करना और शराब व्यापार में उचित प्रतिस्पर्धा का अवसर मुहैया कराना है। सरकार ने कहा था कि नीति के खिलाफ सभी आशंकाएं काल्पनिक हैं। इस नीति को लाने के पक्ष में दिल्ली सरकार ने कई तर्क दिए थे। राज्य सरकार कहना था कि इससे दिल्ली में शराब माफिया और कालाबाजारी समाप्त होगी। दिल्ली सरकार का राजस्व बढ़ेगा। शराब खरीदने वालों की शिकायत भी दूर होगी। इसके अलावा हर वार्ड में शराब की दुकानें एकसमान होंगी।

Related posts

महाराष्ट्र में ‘योगी बनाम भोगी’, UP के सीएम की जमकर हो रही तारीफ उद्धव के फैसलों से नाराज लोग!

Anjali Tiwari

ऋषिकेश में बड़ा प्रदर्शन, दोषियों को जल्द फांसी दिए जाने की मांग

Anjali Tiwari

नई दिल्ली स्टेशन इलाके में गैंगरेप

Anjali Tiwari

Leave a Comment