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इंग्लिश में परेशानी तो अब अपनी भाषा में ही कर सकेंगे लॉ की पढ़ाई

यूजीसी ने शुरू की प्रक्रिया

देश भर के लॉ कॉलेज में क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने की अपनी योजना के साथ आगे बढ़ते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के साथ प्रक्रिया शुरू कर दी है। यूजीसी बार काउंसिल ऑफ इंडिया और भारतीय भाषा समिति ने भारतीय भाषाओं में कानूनी शिक्षा प्रदान करने के महत्व और तौर-तरीकों पर चर्चा की।

दरअसल, इसके लिए बकायदा एक बैठक की गई जिसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा, यूजीसी अध्यक्ष एम जगदीश कुमार और भारतीय भाषा समिति चेयरमैन चामू कृष्ण शास्त्री ने शिरकत की। यूजीसी ने जानकारी दी कि कार्य योजना तैयार करने के लिए बीसीआई द्वारा एक राष्ट्रीय स्तर की समिति का गठन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि यह कदम कानूनी शिक्षा प्रणाली को भारतीय लोकाचार में निहित बनाने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। असल में केंद्र इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए इसे शुरू करने के एक साल बाद लॉ कॉलेजों में क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने के विकल्प का विस्तार करने पर पहले से ही विचार कर रहा था। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है जो क्षेत्रीय     भाषाओं में व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने की वकालत करता है।

12 सदस्यीय समिति का गठन

बीसीआई अध्यक्ष मिश्रा ने अपने बयान में कहा कि अब समय आ गया है कि बुनियादी कानूनी शिक्षा को लोगों के दरवाजे तक ले जाया जाए जो कि बीसीआई को स्कूलों, यूजीसी और शिक्षाविदों के सहयोग से करना है। एनईपी के अनुसार कानून की शिक्षा प्रदान करने वाले राज्य संस्थानों को भविष्य के वकीलों और न्यायाधीशों के लिए द्विभाषी शिक्षा प्रदान करने पर विचार करना चाहिए।

यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा कि यह समिति पहचान करेगी कि किन पुस्तकों का पहले अनुवाद किया जाना है। शुरुआत में हम 12 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने की योजना बना रहे हैं। यह वकीलों को क्षेत्रीय भाषाओं में दस्तावेज तैयार करने और अपने मुवक्किलों के साथ उनकी मातृभाषा में बातचीत करने में मदद करेगा। स्थानीय अदालतों में भी तर्क स्थानीय भाषाओं में ही होते हैं।

बताया गया है कि यूजीसी जिन 12 भारतीय भाषाओं में कानूनी पाठ्यक्रम शुरू करने का लक्ष्य बना रहा है, उनमें हिंदी, गुजराती, असमिया, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू शामिल हैं। यह भी बताया गया कि भारतीय भाषाओं में कानूनी शिक्षा के लिए पाठ्यपुस्तक का निर्माण न केवल छात्रों को विषय में महारत हासिल करने में मदद करेगा, बल्कि कानूनी शिक्षा को अंग्रेजी के साथ-साथ राज्य भाषा के माध्यमों में बदलने में भी मदद करेगा।

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