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मीडिया राइट्स की नीलामी कर BCCI ने कमाए कई हज़ार करोड़,

इस फाइनल मुक़ाबले का लाइव टेलीकास्टिंग और स्ट्रीमिंग की जा रही है। लेकिन DRS नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि DRS टेक्नोलॉजी काफी महंगी है और बीसीसीआई इसे रणजी में यूज नहीं करना चाहता।

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मीडिया राइट्स 48000 करोड़ में बेचने के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) दुनिया का सबसे रईस क्रिकेट बोर्ड बन गया है। लेकिन इसके बावजूद रणजी ट्रॉफी 2022 के फाइनल मुकाबले में बोर्ड को शर्मसार होना पड़ा है। मध्य प्रदेश और मुंबई के बीच बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले जा रहे इस मैच में डिसिजन रिव्यू सिस्टम (DRS) उपलब्ध नहीं है।

इस फाइनल मुक़ाबले का लाइव टेलीकास्टिंग और स्ट्रीमिंग की जा रही है। लेकिन DRS नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि DRS टेक्नोलॉजी काफी महंगी है और बीसीसीआई इसे रणजी में यूज नहीं करना चाहता। बोर्ड ने रणजी ट्रॉफी 2019-20 के सेमीफाइनल और फाइनल के दौरान ‘सीमित डीआरएस’ का प्रयोग किया था। इसमें हॉक-आई और अल्ट्राएज टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया था। लेकिन इस साल बोर्ड ने ऐसा नहीं किया है।

DRS नहीं होने से पहली बार फाइनल खेल रही मध्य प्रदेश की टीम को नुकसान हुआ है। दरअसल इस सीजन में एक के बाद एक शतक ठोकने वाले मुंबई के इनफॉर्म बल्लेबाज सरफराज खान तेज गेंदबाज गौरव यादव की गेंद पर एलबीडबल्यू आउट हो गए थे। लेकिन अंपायर ने उन्हें नॉट-आउट देते हुए ‘जीवनदान’ दे दिया। रीप्ले में साफ देखा जा सकता था कि वे आउट थे।

सरफराज जैसे बल्लेबाज को ऐसे जीवनदान देना एमपी पर भारी पड़ा है और उन्होंने एक बार फिर शतक जड़ दिया है। इस मैच में सरफराज ने अबतक 123 रन बना लिए हैं और मुंबई ने 9 विकेट खोकर 357 रन बना लिए हैं। बता दें इस मैच में भारत के दो सर्वश्रेष्ठ अंपायर केएन अनंतपद्मद्मदमनाभन और वीरेंद्र शर्मा अंपायरिंग कर रहे हैं।

DRS बहुत महंगी तकनीक है। इसीलिए यह सुविधा सभी मैचों में नहीं देखने को मिलती। इसके लिए दो और चार कैमरे के दो अलग -अलग सेटअप लगाए जाते हैं। इनमें 2 कैमरा सेटअप के लिए 6 हजार डॉलर और 10 हजार डॉलर का खर्च आता है। मशीन की वायरिंग और डिरिगिंग बेहद महनगी होती है। इसके अलावा हॉकआई के लिए एक्सट्रा कैमरे लगाए जाते हैं। ऐसे में इसमें करीब 16 हज़ार डॉलर यानि 12 लाख रुपये का खर्च आता है।

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