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कोरोना और मंकीपॉक्स के बाद अब पॉवासन वायरस का खतरा , जाने पूरी खबर

Powassan virus in America: दुनिया अभी कोरोना वायरस और मंकीपॉक्स वायरस के खतरे से उबर नहीं पा रही है कि अब एक और वायरस ने दस्तक दे दी है. संयुक्त राज्य अमेरिका में स्वास्थ्य अधिकारियों ने टिक-जनित पॉवासन वायरस के संक्रमण से कनेक्टिकट की एक महिला की मौत की जानकारी दी है. राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मरने वाली महिला की उम्र 90 वर्ष थी और वह न्यू लंदन काउंटी में रहती थी. वह मई की शुरुआत में इस वायरस की चपेट में आई थी और 17 मई को उसकी मौत हो गई. बताया गया है कि इस साल कनेक्टिकट में इस वायरस की चपेट में आने वाली वह दूसरी महिला थी. हालांकि अभी तक किसी की मौत नहीं हुई थी. आइए आपको बताते हैं इस वायरस से जुड़ी हर जानकारी.

पॉवासन वायरस क्या है

एक्सपर्ट ने अपनी स्टडी में बताया है कि पॉवासन वायरस एक फ्लेवि वायरस है जो टिकों द्वारा प्रेषित होता है. पॉवासन वायरस ज्यादातर उत्तरी अमेरिका और रूस के सुदूर पूर्व में पाए जाते हैं. पॉवासन वायरस का नाम ओंटारियो के पॉवासन शहर के नाम पर रखा गया है, जहां पहली बार 1958 में एक युवा लड़के में इसकी पहचान की गई थी. बाद में उसकी इस वायरस से मौत भी हो गई थी. उत्तरी अमेरिका में जो पॉवासन वायरस पाए गए हैं उसके दो प्रकार होते हैं. एक है लाइनेज-1 और दूसरा है लाइनेज-2.

पॉवासन वायरस कैसे फैलता है

अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि, वायरस से संक्रमित एक टिक के काटने से लोगों को पॉवासन वायरस की बीमारी हो सकती है. डीपीएच आयुक्त मनीषा जुथानी ने बताया कि, “यह घटना हमें याद दिलाती है कि अब टिक काटने को रोकने के लिए कार्रवाई करने की जरूरत है.”

क्या हैं इसके लक्षण

पॉवासन वायरस से संक्रमित कई लोगों में कोई लक्षण देखने को नहीं मिले हैं, जबकि कई लोगों में इसके हल्के फुलके लक्षण ही दिखाई दिए हैं. डॉक्टरों की मानें तो इस वायरस से पीड़ित होने पर बुखार, सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी, दौरे, एन्सेफलाइटिस, मेनिनजाइटिस आदि की समस्या होती है. गंभीर बीमारी वाले मरीजों में सिरदर्द और मेमोरी लॉस से संबंधित समस्या होती है. इस वायरस से मौत का खतरा कम है.

पॉवासन वायरस का इलाज कैसे करें

यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसे वायरस है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर फौरन डॉक्टर से मिलना चाहिए. इस वायरस के इलाज के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है. डॉक्टर अलग-अलग दवा आपको लिखते हैं. इसलिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है.

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