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5 साल के बच्‍चे भी डिप्रेशन का शिकार WHO की रिपोर्ट

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने मेंटल हेल्थ (Mental Health) से जुड़ी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है, जिसके मुताबिक दुनियाभर के करीब 14 फीसदी टीनएजर्स किसी न किसी रूप में मानसिक तनाव के शिकार हैं. इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि वर्ल्ड में 5 से 9 साल के 8% बच्चों को भी कई तरह के डिप्रेशन हैं.

छोटे बच्चे भी स्ट्रेस के शिकार

हालांकि इनमें से ज्यादातर बच्चों की मानसिक बीमारी (Mental Illness) की वजह उनकी फिजिकल डिसेबिलिटी बताई गई है. 5 साल से कम उम्र के हर 50 में से 1 बच्चे को किसी डेवलपमेंटल डिसेबिलिटी की वजह से मेंटल डिजीज हो रही है. अमीर देशों में 15% लोग और गरीब देशों में 11.6 प्रतिशत लोग मानसिक बीमारी के शिकार हो जाते हैं.

970 मिलियन लोगों को मेंटल डिजीज

साल 2019 के डाटा के मुताबिक, 301 मिलियन लोगों को Anxiety Disorder, 200 मिलियन लोगों को डिप्रेशन की बीमारी थी और साल 2020 में कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से यह मामला बढ़ गया कोरोना महामारी आने के बाद 246 मिलियन लोगों को डिप्रेशन हुआ. Anxiety के शिकार लोगों की तादाद भी तेजी से बढ़कर 374 मिलियन हो गई. 1 साल में डिप्रेशन के केस 28% तक बढ़ गए और Anxiety के मामलों में 26% की बढ़ोतरी हो गई.

महिलाओं को ज्यादा होता है डिप्रेशन

कुल मानसिक बीमारों में 52% महिलाएं और 45% पुरुष किसी न किसी मानसिक बीमारी के शिकार हैं. 31% लोगों को दुनिया में Anxiety Disorder है. मानसिक बीमारी का यही प्रकार सबसे ज्यादा फैला हुआ है. 29% लोग डिप्रेशन के शिकार हैं. 11% लोगों को कोई ना कोई फिजिकल डिसेबिलिटी है जिसकी वजह से वह मानसिक तौर पर बीमार महसूस करते हैं.

बढ़ रहे हैं खुदकुशी के मामले

आंकड़ों के मुताबिक, हर 100 में से 1 मौत की वजह सुसाइड है. साल 2019 में 7,03,000 लोगों ने खुदकुशी करके अपनी जान दे दी, यानी कि हर 1 लाख में से 9 लोगों की जान आत्महत्या की वजह से गई. 58% सुसाइड 50 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही हो जाते हैं. मानसिक बीमारी के शिकार लोग अपनी हालत की वजह से अपनी औसत उम्र से 10 से 20 वर्ष कम ही जी पाते हैं.

इन कारणों से डिप्रेस होते हैं बच्चे

दुनियाभर में फैले डिप्रेशन की वजहों पर जब रोशनी डाली गई तो पता चला कि बच्चों के साथ होने वाला सेक्सुअल एब्यूज और बुलिंग, डिप्रेशन के दो बड़े कारण हैं. मौसम के अचानक बदलाव से भी लोग मानसिक तौर पर परेशान हैं.

सामाजिक भेदभाव भी है बड़ी वजह

मानसिक स्वास्थ्य खराब होने के दूसरे बड़े कारणों में शामिल हैं सामाजिक और आर्थिक भेदभाव. युद्ध और अब क्लाइमेट क्राइसिस को भी मानसिक बीमारी की वजह के तौर पर देखा जा रहा है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कोरोना वायरस के पहले ही साल में डिप्रेशन और तनाव के मामलों में 25% की बढ़ोतरी हो गई.

नहीं मिलता मनोरोगियों को इलाज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइकोसिस (Psychosis) के शिकार 71% लोगों को सही इलाज नहीं मिल पाता. जिन लोगों को इलाज मिलता है उनमें से 70% लोग अमीर देशों में रहने वाले होते हैं. गरीब देशों में रहने वाले मानसिक रूप से बीमार लोगों में महज 12% को ही इलाज नसीब हो पाता है.

इसी तरह डिप्रेशन के शिकार महज एक तिहाई लोगों को ही थोड़ा-बहुत इलाज मिल पाता है. गरीब देशों में रहने वाले सिर्फ 3% लोग डिप्रेशन का इलाज करा पाते हैं. जबकि अमीर देशों में रहने वाले सिर्फ 23% लोगों को डिप्रेशन के मामले में डॉक्टरी मदद मिल पाती है.

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