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Ed के चक्कर में कैसे फंसे सोनिया और राहुल गांधी? क्या है नैशनल हेराल्ड से जुड़ा पूरा मामला

 नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जारी ईडी के नोटिस के बाद आज राहुल गांधी की पेशी होनी है, मामले को लेकर पार्टी नाराज है और आज कांग्रेस सभी ईडी मुख्यालयों में पैदल मार्च कर रही है. जयपुर में भी कांग्रेस का पैदल मार्च शुरू हो गया है.

Jaipur : नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल को ईडी का नोटिस भेजने को लेकर आज कांग्रेस देशभर के ईडी मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर रही है. इसे लेकर मुख्यमंत्री गहलोत भी दिल्ली पहुंचे हैं. इधर, जयपुर में भी राजस्थान कांग्रेस का PCC से ED ऑफिस तक पैदल मार्च निकाला गया और ED ऑफिस के बाहर जमकर प्रदर्शन किया. पुलिस बल तैनात किया गया है. ऑफिस के बाहर सड़क पर दोपहर 12 बजे तक यातायात बंद किया गया है.

आपको बता दें कि सोनिया गांधी को नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 23 जून को पूछताछ के लिए पेश होने के लिए समन जारी किया है. वहीं ईडी ने राहुल गाधी को आज पेश होने को कहा था. ईडी मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पूछताछ होनी है. नेशनल हेराल्ड अखबार  मामले में कांग्रेस नेताओं पर आरोप है कि, उन्होंने यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए एसोसिएटेड पत्रिकाओं के 90.25 करोड़ अवैध रूप से वसूले हैं.

ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर क्यों जारी हुआ राहुल और सोनिया को ED का समन? आखिर क्या है नेशनल हेराल्ड केस? राहुल-सोनिया पर ED ने लगाए हैं कौन से आरोप?

नेशनल हेराल्ड केस क्या है?

2012 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में पिटीशन दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ कांग्रेसी नेताओं (राहुल-सोनिया गांधी के अलावा और भी कई नेता) ने गलत तरीके से यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) का अधिग्रहण किया है। स्वामी का आरोप था कि ये सारा मामला दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया था।

समझें पूरा घटनाक्रम?

– जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में Associate Journal Limited नाम से एक कंपनी बनाई। ये कंपनी नेशनल हेराल्ड नाम से एक अखबार पब्लिश करती थी। ये कंपनी अखबार निकालती थी, इसलिए इसे कई शहरों में सस्ती कीमतों पर सरकारों से जमीन मिल गई।

– आरोप ये है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मिलकर एक ऐसी कंपनी बनाई, जिसका उद्देश्य बिजनेस करना नहीं, बल्कि अपनी बनाई कंपनी के  जरिए (AJL) को खरीदकर उसकी 2 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को अपने नाम करना था। 

– इसके बाद 26 फरवरी, 2011 को 5 लाख रुपए की लागत से यंग इंडिया कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38% की हिस्सेदारी है। बाकी 24% की हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास थी। दोनों ही अब इस दुनिया में नहीं हैं।

– यंग इंडिया कंपनी ने एसोसिएट जर्नल लिमिटेड (AJL) की 90 करोड़ की देनदारियों का जिम्मा अपने उपर ले लिया। मतलब एक तरह से उसका लोन चुकाने की जिम्मेदारी ले ली।    

–  बाद में एजेएल के 10-10 रुपए के नौ करोड़ शेयर ‘यंग इंडियन’ को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडिया को कांग्रेस का लोन चुकाना था। 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को इस कंपनी के 99% शेयर मिल गए। बाद में कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन माफ कर दिया। इस तरह राहुल-सोनिया गांधी की कंपनी ‘यंग इंडिया’ को मुफ्त में (AJL) का स्वामित्व मिल गया। 

नेशनल हेराल्ड केस में अब तक क्या हुआ?

  • सुब्रमण्यम स्वामी ने 1 नवंबर 2012 को दिल्ली कोर्ट में केस दर्ज कराई.
  • केस में सोनिया-राहुल के अलावा मोतीलाल बोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा आरोपी बनाए गए.
  • मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 26 जून 2014 को सोनिया-राहुल समेत सभी आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया.
  • ED ने इस मामले में 1 अगस्त 2014 को संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया.
  • मई 2019 को ED ने इस केस से जुड़े 64 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली.
  • 19 दिसंबर 2015 को सोनिया, राहुल समेत सभी आरोपियों को दिल्ली पटियाला कोर्ट ने जमानत दी.
  • 9 सितंबर 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने आयकर विभाग के नोटिस के खिलाफ याचिका खारिज कर दी.
  • कांग्रेस ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.
  • 4 दिसंबर 2018 को कोर्ट ने आयकर की जांच जारी रखने के आदेश दिए
  • कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक कोई आदेश पारित नहीं होगा.
  • इस समन को लेकर कांग्रेस की तरफ से कहा गया है कि सोनिया गांधी 8 जून को पूछताछ में शामिल होंगी. अगर, राहुल दिल्ली में रहे, तो वे भी 8 जून को पूछताछ में शामिल होंगे, अन्यथा ED से समय लेंगे.

सोनिया और राहुल पर हैं कौन से आरोप

दिल्ली उच्च न्यायलय से राहुल गांधी और सोनिया गांधी के अलावा दूसरे बड़े कांग्रेसी नेताओं की याचिका ख़ारिज होने के बाद नेशनल हेरल्ड मामला फिर सुर्ख़ियों में आ गया है.

इन नेताओं ने आयकर विभाग की ओर से वित्त वर्ष 2011- 2012 के दौरान हुए ‘इनकम टैक्स असेसमेंट’ की फिर से समीक्षा करने की पहल को रोकने के लिए याचिका दायर की थी.

सोमवार को आयकर विभाग ने दिल्ली उच्च न्यायलय को बताया कि राहुल गाँधी की ओर से वित्त वर्ष 2011-2012 की गई आयकर की घोषणा के मामले का फिर से अवलोकन किया जा रहा है.

विभाग का कहना है कि इस घोषणा यानी ‘टैक्स असेसमेंट’ में राहुल गाँधी ने ‘तथ्यों को छुपाया’ था.

इन आरोपों को कैसे खारिज करती है कांग्रेस

कांग्रेस का कहना है कि YIL को मुनाफा कमाने के बजाय चैरिटी के उद्देश्य से बनाया गया था। कांग्रेस का ये भी कहना है कि यंग इंडियन लिमिटेड द्वारा किया गया ट्रांजैक्शन फाइनेंशियल नहीं, बल्कि कॉमर्शियल था। कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि जब प्रॉपर्टी या कैश का कोई ट्रांसफर ही नहीं हुआ, तो मनी लॉन्ड्रिंग का कैसे बन सकता है।

सिंघवी का कहना है कि AJL जब घाटे में आ गया तो उसे बचाने के लिए कांग्रेस ने 90 करोड़ की आर्थिक सहायता दी। इससे AJL पर लोन हो गया। उसने इस लोन को इक्विटी में बदला और 90 करोड़ के लोन को नई कंपनी यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन यंग इंडियन नॉन-फॉर-प्रॉफिट कंपनी है और इसके शेयरहोल्डर्स और डायरेक्टर्स को कोई लाभांश नहीं दिया जा सकता है। सिंघवी का दावा है कि इसका मतलब है कि आप इस कंपनी से एक रुपया नहीं ले सकते।

सिंघवी का ये भी दावा है कि अब भी AJL के पास ही पहले की तरह की नेशनल हेराल्ड की सभी प्रॉपर्टी और प्रिंटिंग और पब्लिशर बिजनेस पर अधिकार है। केवल एकमात्र बदलाव ये है कि AJL के शेयर यंग इंडियन के पास हैं, लेकिन यंग इंडियन इस पैसे का किसी भी तरह से इस्तेमाल नहीं कर सकती है। वह न तो लाभांश दे सकती है और न ही प्रॉफिट कमा सकती है।

 

 

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